झारखंड में भयंकर लू से राहत, बारिश ने दिलाई ठंडक

झारखंड में भयंकर लू से राहत, बारिश ने दिलाई ठंडक
के द्वारा प्रकाशित किया गया Manish Patel 22 मार्च 2025 17 टिप्पणि

झारखंड में गर्मी की मार

हाल ही में झारखंड के लोग भयंकर लू से परेशान थे। राज्य के सात जिलों में पारा 40°C के पार चला गया था, जिसमें चाईबासा ने 41°C का तापमान दर्ज किया। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कुछ जिलों जैसे कि सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम में लू का पीला अलर्ट जारी किया था।

जब लगे हाथों में झाड़ू-पोंछे का काम करना तक मुश्किल हो गया था, तब मौसम के इस बदलाव ने बेताब लोगों को राहत दी।

लू से राहत, फसल को चुनौती

20 से 23 मार्च के बीच बारिश और ओलावृष्टि ने वातावरण को ठंडा कर दिया। इस बारिश का कारण एक पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी से भरी हवाएं थीं। हालांकि बारिश ने गर्मी से राहत दी, पर ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं।

कई जिलों में खेतों में खड़ी फसलें जैसे कि गेहूं और सब्जियां बर्बाद हो गईं। आम और लीची के बौर पेड़ों से झड़ गए। रांची ने 0.4 मिमी, जमशेदपुर ने 7.7 मिमी, जबकि डाल्टनगंज में 6.8 मिमी बारिश दर्ज की गई।

IMD ने 40-50 किमी/घंटा की रफ़्तार से हवाओं की चेतावनी दी और सरायकेला-खरसावां जिले के लिए रेड अलर्ट जारी किया। जबकि नई बुवाई के लिए यह नमी वरदान साबित हुई, खड़ी रबी फसलों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।

17 टिप्पणि

  • Image placeholder

    Krina Jain

    मार्च 22, 2025 AT 16:30

    भाईयो बहनो लू की मार से थक गये थे अब बारिश ने थोड़ा आराम दिया पर फसल वाले भाईयों के सिर पर अभी भी बादल हैं इधर‑उधर पानी तो आया पर खेत में पानी की किल्लत है

  • Image placeholder

    Raj Kumar

    मार्च 26, 2025 AT 03:50

    अरे यार बारिश से कुछ नहीं बदलेगा! जलवायु बदल रही है, और हम जूते में पानी डाल के मेले में नाच रहे हैं!

  • Image placeholder

    venugopal panicker

    मार्च 29, 2025 AT 15:10

    प्रिय मित्रों, इस अनपेक्षित वर्षा ने निस्संदेह एक दोहरा प्रभाव डाला है।
    एक ओर गर्मी के उग्र तापमान को ठंडक मिली, तो दूसरी ओर रबी फ़सलों को जल‑जलन का सामना करना पड़ा।
    उचित निवारण उपायों की आवश्यकता है, जैसे ड्रिप इरिगेशन का विस्तार।
    इसके अलावा, किसानों को बीमा योजना के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।
    आशा है प्रशासन समय पर सहायता प्रदान करेगा।

  • Image placeholder

    Vakil Taufique Qureshi

    अप्रैल 2, 2025 AT 03:30

    लू के बाद अब बरसात आई, पर कई लोग सिर्फ राहत की बात कर रहे हैं, जबकि वास्तविक नुकसान को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह सतही दृष्टिकोण पूर्णतः अयोग्य है।

  • Image placeholder

    Jaykumar Prajapati

    अप्रैल 5, 2025 AT 14:50

    देखिए, सरकार हर बार 'वैरिएबल पॉलिसी' बोलती है, लेकिन जमीन पर क्या हो रहा है? टेढ़ी-मेढ़ी हवाओं ने सिर्फ फसल नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे को भी हिला दिया। कुछ लोग मानते हैं ये सब एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है, और शायद सही भी है, क्योंकि जानकारी छिपी हुई है। फिर भी, हमें अपने खेतों को बचाने के लिए स्थानीय जल संचयन तकनीकों को अपनाना चाहिए।

  • Image placeholder

    PANKAJ KUMAR

    अप्रैल 9, 2025 AT 02:10

    सबको नमस्कार, इस वर्ष की अनिश्चित मौसम ने हमें एकजुट करने का अवसर दिया है। मिलकर हम समाधान निकाल सकते हैं, जैसे सामुदायिक जल टैंक बनाना। आशा है यह चर्चा उपयोगी सिद्ध होगी।

  • Image placeholder

    Anshul Jha

    अप्रैल 12, 2025 AT 13:30

    जैसे ही मैं इस बात को पढ़ा,怒 हुआ! राष्ट्रीय हित के लिए जलसंचयन को प्राथमिकता देनी चाहिए, नहीं तो हारी हमारी फसलें!

  • Image placeholder

    Anurag Sadhya

    अप्रैल 16, 2025 AT 00:50

    बारिश आई, पर फसल मौन नहीं रहेगी 😊। हमें इस ठंडक को सही दिशा में मोड़ना चाहिए। 💧

  • Image placeholder

    Sreeramana Aithal

    अप्रैल 19, 2025 AT 12:10

    भाई, यह केवल मौसम नहीं, यह राजनीतिक खेल है। किसानों को मार्टियल्स की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।

  • Image placeholder

    Anshul Singhal

    अप्रैल 22, 2025 AT 23:30

    समय के दर्पण में देखते हैं तो यह स्पष्ट है कि झारखंड की इस वर्ष की जलवायु परिवर्तन एक बहु‑आयामी समस्या है।
    पहले मार्च में जब गर्मी ने 40 डिग्री से ऊपर का तापमान देखा, तो लोगों ने श्वास ही नहीं ले पाई।
    ऐसी स्थिति में जब एम्बिएन्ट थर्मामीटर इतना ऊँचा दिखाता है, तो सामुदायिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव अनदेखे नहीं रह सकते।
    फिर अचानक आया वह बरसाने वाला हवाबंद, जिसने वातावरण को ठंडा कर दिया, पर साथ ही वह ओलावृष्टि ने कच्ची फसल को जल‑जली बना दिया।
    ध्यान दें, धान की बुआई के समय में जब पर्याप्त नमी की जरूरत होती है, तो अचानक अत्यधिक बौछारें फसल के विकास को बाधित करती हैं।
    स्थानीय किसानों ने बताया कि गेहूं की लम्बी डंडी पर पानी की बूंदें गिरते ही सड़न शुरू हो गई।
    बाजार में फल‑सब्जियों की कीमतें अब तक नहीं देखी गईं, क्योंकि फसल क्षति ने आपूर्ति घटा दी।
    सरकार ने रेड अलर्ट जारी किया, पर वास्तविक मदद की गति इस गति से नहीं मिल पाई।
    समाज के विभिन्न वर्गों को इस संकट में एकजुट होने की जरूरत है, चाहे वह कृषि विशेषज्ञ हों या आम किसानों की स्वयंसेवी टीम।
    ड्रिप इरिगेशन और हाइड्रोपोनिक तकनीकें इस समय एक समाधान के रूप में सामने आ सकती हैं।
    तकनीकी प्रशिक्षण के लिए ऑनलाइन वेबिनार आयोजित करने से ज्ञान का प्रसार आसान होगा।
    साथ ही, बीमा कंपनियों से तेज़ क्लेम प्रोसेसिंग को सुनिश्चित करना चाहिए।
    पर्यावरणीय संकल्पों में वृक्षारोपण को प्राथमिकता देना भी आवश्यक है, क्योंकि पेड़ मिट्टी के तापमान को नियंत्रित करते हैं।
    इतना ही नहीं, स्थानीय जल संचयन व्यवस्था को सुदृढ़ करने से भविष्य में ऐसी असमानता कम होगी।
    सरकार, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज को मिलकर एक समग्र योजना बनानी चाहिए, जिसमें वित्तीय, तकनीकी और जागरूकता के पहलू शामिल हों।
    अंततः, यह सिर्फ एक मौसम का प्रश्न नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की सुरक्षित खेती का सवाल है।

  • Image placeholder

    DEBAJIT ADHIKARY

    अप्रैल 26, 2025 AT 10:50

    आदरणीय महोदय, आपने बहुत विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया है। यह विश्लेषण नीति निर्माताओं के लिये मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। कृपया इस दिशा में और शोध को प्रोत्साहन दें।

  • Image placeholder

    abhay sharma

    अप्रैल 29, 2025 AT 22:10

    बारिश भी अस्थायी, फिर भी सभी उत्सव मानते हैं।

  • Image placeholder

    Abhishek Sachdeva

    मई 3, 2025 AT 09:30

    ये सब तो आम बात है, लेकिन जिम्मेदारी सिर्फ मौसम की नहीं है। तत्काल उपायों की आवश्यकता है।

  • Image placeholder

    Janki Mistry

    मई 6, 2025 AT 20:50

    वॉटर‑ट्रांसफर सिस्टम इम्प्लीमेंटेशन के माध्यम से टेम्परेचर स्मूदिंग संभव है। अनुमानित ROI 12% है।

  • Image placeholder

    Akshay Vats

    मई 10, 2025 AT 08:10

    बारिश किच्ची है पर फसल कडोरा रहै थे। सरकार जल्दी प्रोसेस करे।

  • Image placeholder

    Anusree Nair

    मई 13, 2025 AT 19:30

    हम सबको मिलकर इस चुनौती को मात देनी होगी। सकारात्मक सोच और टीम वर्क से हम सफलता प्राप्त करेंगे। याद रखें, हर बारिश नई उम्मीद लाती है।

  • Image placeholder

    Bhavna Joshi

    मई 17, 2025 AT 06:50

    जैसे ही हम इस मुद्दे को गहन रूप से विश्लेषण करेंगे, हमें समझ आएगा कि जलवायु परिवर्तन के साथ सुसंगत कृषि प्रथाएँ आवश्यक हैं। इसलिए, डेटा‑ड्रिवन निर्णय लेना अनिवार्य है। इसी दिशा में हम सबको प्रोत्साहित करना चाहिए।

एक टिप्पणी लिखें