भारत सेवाश्रम संघ के संत ने ममता बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजा, 48 घंटे में माफी की मांग

भारत सेवाश्रम संघ के संत ने ममता बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजा, 48 घंटे में माफी की मांग

भारत सेवाश्रम संघ (BSS) के एक संत स्वामी प्रदीप्तानंद ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक कानूनी नोटिस जारी किया है, जिसमें उनसे 48 घंटों के भीतर बिना शर्त माफी मांगने और अपने आरोपों को वापस लेने की मांग की गई है। अधिवक्ता बिल्वदाल भट्टाचार्य द्वारा भेजे गए नोटिस में, ममता बनर्जी द्वारा प्रदीप्तानंद और अन्य संतों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए काम करने का आरोप लगाने के खिलाफ प्रतिक्रिया दी गई है।

प्रदीप्तानंद, जिन्हें कार्तिक महाराज के नाम से भी जाना जाता है, औरंगाबाद, बेलडांगा (मुर्शिदाबाद) और पायरादंगा (नादिया) में BSS के सचिव के पद पर हैं। उन्होंने ममता बनर्जी से आगे मानहानिकारक बयानों से बाज आने की मांग की है और यदि वह चार दिनों के भीतर जवाब देने में विफल रहती हैं, तो उनके खिलाफ आपराधिक मामले शुरू करने का अधिकार सुरक्षित रखा है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब ममता बनर्जी ने हुगली में एक रैली को संबोधित करते हुए कार्तिक महाराज की राजनीति में शामिल होने के लिए आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि वह उन्हें एक संत नहीं मानती हैं क्योंकि वह सीधे राजनीति में शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ममता बनर्जी पर ISKCON, RKM और BSS सहित विभिन्न धार्मिक संगठनों को बदनाम करने और धमकाने का आरोप लगाया है, ताकि मुसलमानों और घुसपैठियों की रक्षा की जा सके, जिन्हें TMC का वोट बैंक कहा जाता है। मोदी ने लोगों से अपील की कि वे TMC की तुष्टीकरण की राजनीति का जवाब अपने वोट से दें।

ममता बनर्जी पर लगे आरोप

ममता बनर्जी ने हुगली में एक रैली के दौरान कार्तिक महाराज पर उनकी राजनीतिक गतिविधियों के लिए निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि वह उन्हें एक संत नहीं मानती हैं क्योंकि वह खुलेआम राजनीति में शामिल हैं। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि कई संत और मठ BJP के लिए काम कर रहे हैं।

इसके अलावा, ममता बनर्जी ने RKM और ISKCON जैसे अन्य धार्मिक संगठनों पर भी BJP के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि ये संगठन मुसलमानों और अवैध घुसपैठियों के खिलाफ काम कर रहे हैं।

BSS संत की प्रतिक्रिया

ममता बनर्जी के आरोपों के बाद, BSS संत स्वामी प्रदीप्तानंद ने उन्हें एक कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में ममता से 48 घंटों के भीतर बिना शर्त माफी मांगने और अपने बयान वापस लेने की मांग की गई है।

प्रदीप्तानंद ने कहा है कि यदि ममता अपने बयान वापस नहीं लेती हैं और माफी नहीं मांगती हैं, तो वह उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने ममता बनर्जी को चेतावनी दी है कि वह भविष्य में इस तरह के आरोप न लगाएं।

PM मोदी की प्रतिक्रिया

इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ममता बनर्जी पर विभिन्न हिंदू धार्मिक संगठनों को धमकाने और बदनाम करने का आरोप लगाया है।

मोदी ने कहा कि ममता बनर्जी मुसलमानों और अवैध घुसपैठियों की रक्षा के लिए ऐसा कर रही हैं, जिन्हें TMC का वोट बैंक माना जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस तुष्टिकरण की राजनीति का जवाब अपने वोट से दें।

निष्कर्ष

BSS संत स्वामी प्रदीप्तानंद द्वारा ममता बनर्जी को भेजा गया कानूनी नोटिस एक ऐसा मामला है जिसने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना ने एक बार फिर से TMC और BJP के बीच चल रहे राजनीतिक संघर्ष को उजागर किया है।

ममता बनर्जी द्वारा विभिन्न धार्मिक संगठनों पर लगाए गए आरोपों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। PM मोदी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी की आलोचना की है।

यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मामला किस दिशा में जाता है और क्या ममता बनर्जी इस मामले में कोई सफाई देती हैं या माफी मांगती हैं। साथ ही साथ, यह भी देखना होगा कि क्या BSS संत अपनी धमकी के अनुसार ममता के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई करते हैं।